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तलाक/पुनर्विवाह समस्या का ज्योतिष समाधान

आजकल के ज़माने में वैवाहिक जीवन का सफल हो पाना बेहद मुश्किल हो गया है। आजकल पति-पत्नी छोटी-छोटी बातों पर भी तलाक लेने जितना बड़ा फैसला ले बैठते हैं। लेकिन कई बार शादी के बंधन में बंधे दो लोगों में से अन् साथी तलाक लेने के लिए राज़ी नहीं होता एवं वह अपने शादी के अटूट रिश्ते को बचाना चाहता है। आज हम आपको बता रहें हैं कि ऐसे ही परिस्थिति से कैसे निपटना चाहिए एवं कुंडली के किस योग में किसी जातक को तलाक लेना पड़ता है। तलाक/पुनर्विवाह की समस्या के समाधान के लिए कोई भी साधक गुरु जी से परामर्श कर अपने जीवन में किसी भी समस्या को हटा सकता है |

कुंडली में पुनर्विवाह/तलाके के योग:

सूर्य, राहु और शनि तथा बारहवें स्थान का मालिक तलाक की स्थिति उत्पन् करते हैं। कुंडली का सप्तम भाव, सप्तम भाव का स्वामी और सप्तम स्थान का कारक ग्रह वैवाहिक सुख का संकेत देते हैं कुंडली के सातवें भाव में सूर्य विराजमान हो तो पार्टनर के अहंकार और अपनी बात को सर्वश्रेष् ठहराने के कारण अलगाव की स्थिति उत्पन् होती है। ज्यादातर सप्तम में बैठा सूर्य अहंकार और जिद्दीपने के कारण अलगाव देता है। कुंडली में लग् भाव के स्वामी और चंद्रमा से सप्तमेश शुक्र की स्थिति से सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

सप्तम भाव के स्वामी की युति द्वादेश के साथ सप्तम भाव या बारहवें भाव से हो तो उस जातक के तलाक के योग बनते हैं। यदि लग् स्थान में शनि या शुक्र के साथ राहु बैठा हो या सूर्य, शनि, राहु द्वादश भाव का स्वामी चौथे घर में बैठा हो तो उस व्यक्ति के तलाक की संभावना रहती है। सप्तम भाव में राहु का उपस्थित होना सेप्रेशन की ओर इशारा करता है। ऐसी दशा में जातक का पार्टनर रहस्यमयी और झूठ बोलता है। सप्तम स्थान पर जितना अधिक पाप ग्रहों का वर्चस्व होगा उतनी अधिक समस्या आयेगी। सेप्रेशन कितने समय तक रहेगा यह पूर्णत: सप्तम पर पड़ने वाले प्रभाव पर निर्भर करता है।

अगर किसी की कुंडली में गुरु में शुक्र की दशा चल रही है या शुक्र में गुरु की दशा से गुज़र रहे हैं तो पति-पत्नी के बीच हमेशा कलह रहती है।