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गृह क्लेश, मानसिक परेशानियां दूर करने के उपाय

सामूहिक रूप से रहने वाले प्राणियों से परिवार-परिवार से समाज एवं समाज से राष्ट्रों का निर्माण होता है यह सब एक ही सूत्र में तभी बंधे रह सकते हैं जब परिवारों में, उसके सदस्यों में परस्पर प्रीति हो, समविचार हों, एक-दूसरे की भावनाओं का आदर करने वाले हों, अनुशासित हों, अच्छे संस्कारों का पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचालन हो  पारिवारिक संगठन  सुदृढ़ता का मूल सूत्र एवं आधार है इन सभी तथ्यों के परिवार में होने से, परिवार में परस्पर संगठन एवं मधुरता आती है

प्रतिकूल परिस्थितियों में गृह क्लेश, मानसिक परेशानियां, ऋण, रोग इत्यादि परिवार में बने रहते हैं जहां ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों के सामाजिक पारिवारिक एवं अन्य मनोवैज्ञानिक कारण हैं वहां ज्योतिष भी इसके बारे काफी हद तक मार्गदर्शन करता है  जन्मकुंडली मात्र जातक के निजी व्यक्तित्व अथवा उसके भविष्य बारे इंगित ही नहीं करती जन्म कुंडली के बारह भाव अलग-अलग शारीरिक अंगों के बारे में जहां इंगित करते हैं, वे जातक के निजी सम्बन्धों-सम्बन्धियों का भी प्रतिनिधित्व करते हैं  जन्म कुंडली में चौथा भाव सुख, माता, भूमि का दर्शाया गया है-जन्म कुंडली का लग्न आप स्वयं है यदि कुंडली से चौथे भाव में कोई क्रूर ग्रह क्रमश: राहू-केतु-शनि मंगल (कर्क) का बैठा हो, अथवा चतुर्थ भाव का स्वामी ग्रह छठे भाव-एकादश भाव-द्वादश भाव में हो, सप्तम भाव के स्वामी ग्रह, द्वादश में हों, छठे भाव का स्वामी अष्टम में हो-अष्टम का स्वामी छठे भाव में हो

दशम भाव के स्वामी ग्रह का लग्न के साथ मित्र भाव हो तो पिता, पुत्र में वैमनस्य छठे-आठवें भाव में शनि-शनि राहू हो तो पितृ, दोष -राहू और केतु क्रमश: भावों में सभी 7 ग्रह जाएं तो कालसर्प योग, सप्तम भाव में नीच राशि गत ग्रह हो और उस भाव का स्वामी भी 12वें भाव में नीच राशि हो तो पति-पत्नी में वैमनस्य कलह-क्लेश होता है। इन सभी तथ्यों की उपस्थितियों में ज्योतिष उपायों द्वारा मार्गदर्शन करके इनसे निजात- छुटकारा दिलवाता है। 

- यदि किसी भी जन्मकुंडली में पितृ-दोष हो तो उसका उपाय है, हर अमावस को ब्राह्मण को घर बुलाकर दोपहर मध्य 12 बजे के बाद आदर से भोजन कराएं, नित्य अपने पितरों के प्रति स्नान के बाद तीन तर्पण जल से करें, ‘ऊँ सर्व पितृ तर्पयामीकहते हुए जल छोड़ें

- हर अमावस को एक कटोरी चावल उबालकर ठंडा करके एक गोल पिंड बना उसकी रोली-मौली चंदन-पुष्प से पूजन करें उसके ऊपर कच्चा दूध, गंगा जल भी चढ़ाएं, उपरांत एक माला गायत्री मंत्र की करके कुछ देर के लिए कमरा बंद करके - वह पिंड पूजन सामग्री सहित गाय को खिला दें

- नित्य सांयकाल (गाय गोबर के दीपक बना लें) अपने घर के द्वार के पास तुलसी के पौधे के पास गाय गोबर के दीपक में घी का दीपक जलाएं ऐसा 40 दिन अवश्य करें अति लाभकारी उपाय है

- नित्य सांयकाल सारे घर में कच्चे दूध में 9 बूंद शहद मिला कर छींटा दें बाद में गुग्गल, हरमल, लोबान, मोटी अजवायन,पीली सरसों के मिश्रित पाऊडर की धूनी दें

- पति-पत्नी में वैमनस्य हो तो अपने शयन कक्ष में सायंकाल एक मुशकपूर की टिक्की पर 3 लौंग रख कर जलाएं आधा घंटा कमरा बंद रखें, ऐसा नित्य प्रति 108 दिन करें  

- अपने माता-पिता के नित्य चरण स्पर्श कर शुभ आशीर्वाद लें उनकी सेवा करें

- अपने घर की चौखट या घर के आगे का स्थान प्रात: अवश्य धोएं

- कालसर्प कुण्डली में हो तो 18 सूखे नारियल रविवार को18 अलग-अलग मंदिरों में एक-एक करके चढ़ाएं अथवा चांदी के सर्प-सर्पणी के ऐसे जोड़े बनाएं जिसकी आंखों में लहसुनिया नग लगा हो, पूंछ पर गोमेद लगा हो इसका नदी किनारे काल सर्प पूजन-राहू-केतु पूजन-वास्तु पूजन किसी कर्मकांडी देवज्ञ ब्राह्मण से कराएं 3 पूर्णिमा 2 अमावस कुल पांच पूजन कराएं

- घर में सदैव गायत्री मंत्र की ध्वनि तरंगें, मंत्र चलता रहे